माँ बहुत दर्द सह कर,
अपने अधूरे ख़्वाबों को अपनी पलकों पे लेकर,
मैं जा रही हूँ तुझसे दूर;
मौत का डट कर किया है मुक़ाबला तेरी बेटी ने,
इस बात पर करना गुरूर।
तू मुझसे लिपट कर ना रोना,
"अगले जनम मोहे बिटिया ना करना",
बस यही एक दुआ करना।
माँ मेरी ज़िन्दगी हार गयी,
और जीत गयी दरिंदगी,
इंसानियत आज फिर से शर्मसार हुई,
एक और बेटी की दर्दनाक चींखें अनसुनी रह गयी।
लौटना चाहती थी जल्द, तेरे सपनों को पूरा करने के लिए,
पर शायद उन हैवानों ने मेरी आँखों में सपनों को ना देखा,
और कुचल दिया उन्हें अपने स्वार्थ के लिए।
माँ तेरी दी हुई इस जीवन की रक्षा नहीं कर पायी,
उनकी हैवानियत के आगे मैं बलि चढ़ गयी।
दामिनी तू लौट आ,
अपने गुनाहगारो का दमन कर,
एहसास करा दे हम बेटियां भी किसी से कम नहीं।
उन दरिंदो को उनकी सज़ा देती जा,
बेटियों के लिए ये दुनिया फिर से आबाद करती जा।
तेरी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जायेगी,
तुझे हम नहीं भूलेंगे।
तू जहाँ भी रहे, खुश रहे,
यही हैं एक दुआ,
कोई और
"दामिनी" ना बने,
यही हैं हम सबकी रज़ा।
- अपूर्वा मंडल
Superb Well Written!! Touched my heart!!
ReplyDeletenice lines
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ReplyDeleteBahut aacha likha ha ji aap na keep posting
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